शिक्षक बनने की दहलीज़ पर

शिक्षक बनने की दहलीज़ पर

Posted on: Sun, 02/22/2026 - 07:19 By: admin
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शिक्षक बनने की दहलीज़ पर

 

पिछले शुक्रवार को कुछ स्टूडेंट्स मिलने आए और यह कहते हुए बोले, “सर, आज हमारा आख़िरी दिन है।” इस संस्था में — बल्कि किसी भी संस्था में — यह कहना किसी के लिए भी एक कठिन क्षण होता है। जिस उम्र में ये छात्र-छात्राएँ होते हैं, दो वर्षों में संस्था के साथ एक बहुत ही गहरा लगाव विकसित हो जाता है, और तब यह क्षण आसान नहीं रहता। वे यह भी कहते हैं कि कुछ समय पहले तक लगता था कि कब यह कोर्स खत्म हो, और अब ऐसा लगता है कि इतनी जल्दी खत्म हो रहा है कि यहाँ से जाने का मन ही नहीं करता।

हमारे कई विद्यार्थी दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं। कई सुबह 6:00 या 6:30 बजे घर से निकलते हैं और 9:00–9:30 तक पहुँच पाते हैं। वापस जाते समय 4:00 बजे छुट्टी होती है और वे 7:00–7:30 बजे तक घर पहुँचते हैं। कई बार उन्हें बस बदलनी पड़ती है, मेट्रो बदलनी पड़ती है, लेकिन उसके बावजूद दो वर्षों तक वे लगातार आते रहे। संस्था में होने का अनुभव, अपने साथियों से मिलने और साथ सीखने का अनुभव इतना संतोषदायक होता है कि यात्रा की असुविधाएँ धीरे-धीरे महत्व खो देती हैं।

फिलहाल, मेरे लिए भी यह बहुत ही विशेष क्षण है। यह पहला बैच है जिसे मैंने इस स्तर पर पढ़ाया है, और अब वे उत्तीर्ण होकर बाहर जा रहे हैं। ये सभी अब स्कूलों में पढ़ाने के लिए योग्य हैं। मैं हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहा हूँ कि यह कितना बड़ा अवसर है; यहाँ से पास होने वाला हर विद्यार्थी अपने जीवन में अनगिनत लोगों के जीवन को गहराई से प्रभावित करेगा। माना जाता है कि एक शिक्षक अपने जीवनकाल में कम से कम 10,000 बच्चों के जीवन को प्रभावित करता है, और लगभग 150 विद्यार्थी हमारे यहाँ से उत्तीर्ण होकर जा रहे हैं। यदि हम 150 को 10,000 से गुणा करें, तो यह लगभग 15 लाख लोगों के जीवन को प्रभावित करने की संभावना बनती है। इसे 15 लाख परिवारों के रूप में भी देखा जा सकता है — और यह वास्तव में एक बहुत बड़ी संख्या है। इनमें से अधिकांश बच्चे सरकारी स्कूलों में जाकर पढ़ाने की इच्छा रखते हैं, और जल्दी या देर से वे पढ़ाने भी लग जाते हैं। इन संस्थानों से पास होने वाले ज्यादातर विद्यार्थी दिल्ली के सरकारी स्कूलों, केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों या अन्य राज्यों के विद्यालयों में पढ़ाते हैं।

अपनी बातचीत में मैं इन बच्चों से बार-बार कहता हूँ — पिछले दो दशकों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पृष्ठभूमि  का स्वरूप बहुत बदला है, अब अधिकतर बच्चे आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। इसलिए मेरी उनसे हमेशा यही अपील रहती है कि सरकारी स्कूलों में आने वाले बच्चे कठिन जीवन परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं। हिंसा, प्रताड़ना, भेदभाव और अस्वीकार उनके दैनिक जीवन का हिस्सा होते हैं।

और शायद स्कूल ही एकमात्र जगह होती है जहाँ उन्हें जीवन का एक वैकल्पिक अनुभव मिल सकता है। इन बच्चों के जीवन में बहुत कठिनाई होती है, और हर शिक्षक के पास यह अवसर होता है कि वह उनके भीतर यह भरोसा पैदा करे कि इंसानियत भी है और जीवन बेहतर भी हो सकता है। उनसे प्यार और सम्मान से पेश आएँ, क्योंकि हो सकता है कि जिस परिवेश में वे पल-बढ़ रहे हैं, वहाँ उन्होंने सम्मान, स्नेह और न्यायपूर्ण व्यवहार देखा ही न हो। इसलिए हर शिक्षक के पास यह मौका होता है कि वह मानवता के इस खूबसूरत हिस्से पर उनका विश्वास कायम करे।

जहाँ तक सीखने-सिखाने की बात है, इसकी प्रकृति बहुत तेजी से बदल रही है। बच्चे विषयवस्तु सीख ही लेंगे, लेकिन भरोसा पैदा करना — जीवन के बेहतर पक्ष, मानवता, सच्चाई, समानता, बराबरी और न्याय के प्रति — यह एक कठिन काम है, और शायद यही सबसे महत्वपूर्ण काम भी है। मैं अपने विद्यार्थियों से यही कहता हूँ कि उन्हें बच्चों के बीच आदर्श बनकर रहना है, ताकि उन्हें देखकर बच्चों में जीवन के बेहतर पक्ष पर विश्वास पैदा हो और वे बेहतर इंसान बन सकें। यही मेरा संदेश रहता है, जो मैं उनके साथ साझा करता हूँ। मेरी कोशिश रहती है कि मैं भी इन्हीं कसौटियों पर खरा उतर सकूँ।

मेरी पूरी उम्मीद है कि ये सभी अपने-अपने जीवन में बहुत सफल होंगे। कई बार मैं कक्षा में यह बात कह भी देता हूँ, और कुछ विद्यार्थियों को यह अच्छा नहीं लगता। दुर्भाग्य से, शिक्षण का स्वरूप भी कुछ ऐसा ही बन गया है। शिक्षक बनने के लिए कौन आ रहे हैं? समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से मैं एक सूत्र समझाकर उन्हें बताता हूँ कि या तो आर्थिक रूप से कमजोर घरों के लड़के, या लड़कियाँ — समाज मुख्यतः इन्हीं समूहों को शिक्षक के रूप में देखना चाहता है। जब वे इस सूत्र को अपने ऊपर लागू करके देखते हैं, तो वे स्वयं आश्चर्यचकित हो जाते हैं और मानते हैं कि बात में सच्चाई है।

अब उनके ऊपर जिम्मेदारी है कि वे लाखों बच्चों के जीवन में बेहतर जीवन और जीवन के खूबसूरत पक्ष के प्रति विश्वास और भरोसा पैदा करें। मुझे लगता है कि पढ़ाने की असली सफलता इसी में बसी हुई है।